Navic Indian Regional Navigation Satellite System

Navic क्या है कैसे करेगा काम स्मार्टफोन में

अगर आप smartphone इस्तेमाल करते है और बहुत जल्द Xaiomi कम्पनी का नया samrtphone खरीदने वाले है तो आपके लिए ISRO की ओर से डबल खुशखबरी है

क्योंकि कंपनी का आप जो भी स्मार्टफोन लॉन्च होने जा रहा है उससे आपका अपना यानी हिंदुस्तान का Navigation काम करेगा जिसे अपनी चमक और धमक के साथ तैयार है हिन्दुस्तानी का Navigation यानी Navic Xaiomi India के SEO Manu Kumar Jain ने Announce किया है

कि Xaiomi भारत के स्वदेशी Navigation सिस्टम Navic के साथ फोन लॉंच करने वाला पहला Brand होगा Jain ने Twitter पर इस Announcement के साथ एक फोटो भी शेयर की हैं

कैसे करेगा काम ?Navic

जिसमें ISRO के Chairman Dr K Siwan को Redmi K20 Pro देते नजर आ रहे हैं यानी Xaiomi कंपनी अपने नये फ़ोन मे Navic का फीचर्स देने वाली है

Smartphone निर्माता कंपनी Xaiomi ISRO के Regional Navigation Satellite System तकनीक Navic इस्तेमाल करेगी यह तकनीक साल 2020

आने वाले कंपनी के सभी Smartphone के उपयोग में लाई जाएगी navic

Navigation With Indian Constitution के इस्तेमाल से किसी भी Location की सटीक जानकारी हासिल की जा सकेगी navic

NAVIC साल 2020 में Navic सपोर्ट तकनीक Xaiomi Smartphone कई Price Point में उपलब्ध रहेंगे । ISRO ने बनाया है Navigation का तूफान ।

Navic Navigation सिस्टम को ISRO ने डब्लप किया है कई देशों के पास उनकी अपनी Navigation सिस्टम है।

Russia की ओर से खुद का GLONASS इस्तेमाल किया जाता है वही European Union अपना Galileo और Chaina BeiDou सेटलाइट सिस्टम का इस्तेमाल Navigation के लिए कर रहा है Navic Navigation सिस्टम केवल भारत पर फोकस करता है और ISRO का कहना है कि 

GPS के मुकाबले कहीं ज्यादा सटीक जानकारी देगा navic

इसकी मदद से 5 मीटर तक की position accuracy मिल सकेगी और Qualcomm ने जनवरी में बनाया था

चिपसेट Qualcomm Technology की तरफ से खासकर Navic तकनीक को सपोर्ट देने के लिए Qualcomm मोबाइल प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है

जनवरी में Qualcomm 3 नये चिपसेट Snapdragon 720G,662,460 लांच किये गए है जिनके साथ GPS के Made In India की कल्पना Navic का सपोर्ट दिया गया है

यानी कि चिपसेट भारत के Navigation सिस्टम Navigation With Indian Constitution यानी Navic से सिग्नल लेने में सक्षम है

जिसके बाद चीनी फ़ोन निर्माता कम्पनी Xaiomi और Realme ने घोषणा की थी ओ जल्द ही नए चिपसेट वाले स्मार्टफोन लांच करेंगे

हालांकि इस मामले में Xaiomi बाजी मरती दिख रही है आने वाले वक्त में ये Navigation बाकि फोन में सपोर्ट करने लगेगा ।

क्या है नेविगेशन सिस्टम नाविक? navic

नाभिक आठवां सैटेलाइट वाला रीजनल नेविगेशन सिस्टम है इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र ने ही विकसित किया है

जिनमें 7 सैटेलाइट लोकेशन TIMING,NAVIGATION और POSITIONING बताएंगे जबकि आठवां सैटेलाइट MESSAGING सर्विस में लिया जाएगा

यह भारत और इसके आसपास डेढ़ हजार किमी दायरे की स्थित देशों में POSITIONING सर्विस मुहैया करवाएंगे।

भारत के NAVIC से भी सिग्नल ले सकेंगे।

आसान भाषा मैं इसका मतलब है कि यह GOOGLE MAP,OLA,UBER,जैसे APP GPS के साथ-साथ अगर भारत की बात की जाए तो यह GPS से भी अधिक सटीकता से काम करेगा। 2016 मैं NAVIC की शुरुआत की गई थी।

जिसे भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने लांच किया था।अब जल्द ही यह XIAOMI और REALME के अगले स्मार्टफोन में देखने को मिलेगा

स्मार्टफोन में बढ़ेगा नाविक का इस्तेमाल? navic

इसरो ने इस मौके पर बयान जारी करते हुए कहा कि इस CHIPSET को बाजार में आने के बाद स्मार्टफोन में NAVIC का इस्तेमाल बढ़ेगा कंपनियां ऐसे स्मार्टफोन लांच करेंगी

जिसमें NAVIC इनेबल्ड चिप लगेगा इसरो प्रमुख के सिवन ने कहा था कि स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल देश के विकास में एक अहम कदम है।

लोगों के दिनचर्या में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है उन्होंने कहा कि QUALCOMM ने अपने मोबाइल प्लेटफॉर्म में NAVIC को सपोर्ट करना हर भारतीय तक इस स्वदेशी सिस्टम से फायदा पहुंचाएगा

इसरो वैज्ञानिक के मुताबिक आजकल अधिकतर स्मार्टफोन में ऐसे CHIPSET आते हैं जो रूस के GLONASS जिसका पूरा नाम है Global Navigation satellite system और चीन के BeiDou Navigation Satellite System (BDS) से सिग्नल पकड़ते हैं।

ऑटोमेटिक ही उस सिस्टम से कनेक्ट हो जाएंगे।

अब नए चिपसेट लगने के बाद स्मार्ट फोन। जो उस इलाके में बेहतर कवरेज देते हैं। वही एक अधिकारी ने बताया कि एक बार NAVIC लगे हुये स्मार्टफोन बाजार में आज आने के बाद इस सिस्टम पर BASED APP बनाई जा सकती है।

अमेरिकी GPS का भी बाप है NAVIC ?

Navic यानी कि नेविगेशन इंडियन विद कांस्टेलेशन इस सिस्टम का नाम भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिया था अप्रैल 2016 में। 7 सैटेलाइट लांचिंग के समय उन्होंने यह नाम दिया था।Navic के दो तरह के सर्विस के लिए डिजाइनिंग किया गया है। पहला standard Positioning सर्विस है जो सभी यूजर को दी जाएगI

दूसरी The Strict सर्विस यहां पूरी तरीके से Incorrected है। यह सर्विस केवल अधिकृत लोगों को ही दी जाएगी ये अमेरिकी GPS की तरह है।

जो हमारे मोबाइल फोन में GPS इंस्टॉल रहता है। वह पूरी तरीके से अमेरिका के कंट्रोल में है। अमेरिका जब चाहे इस GPS सिस्टम को बंद कर सकता है ।

भारत को क्यों जरूरी? नाविक की लॉन्चिंग ? navic

भारत को इस लिए Navic द्ध के समय अमेरिका कभी भी इस सर्विस को बंद कर सकता है। जैसे युद्ध में भारत को खास नुकसान हो सकता है। लिहाजा भारत युद्ध के समय इस्तेमाल नहीं कर सकता है साथ ही

इसे ट्रैकिंग से जुड़ी बहुत गड़बड़ियां भी है। इस लिये भारत को अपना एक सेटेलाइट नेविगेशन सिस्टम तैयार करना पड़ा।

इसके लिए इसरो ने मात्र 3 के अंदर नाविक के सभी 7 सेटेलाइट को लांच कर दिया। भारतीय स्मार्टफोन पर इसका सिग्नल मिलेगा।

क्योंकि यह सैटेलाइट भारत के ऊपर है इसलिए भारत मैं इसकी सटीकता। मैप के सिस्टम से कहीं ज्यादा होगी

यानी अब चाहे स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया जाए या गाड़ी यह ज्यादा उपयोगी होगी आपकी की स्थिति व परिस्थिति पर ज्यादा सटीकता से बताएगा ।

लक्ष्य तक पहुंचाना बेहद आसान हो जाएगा

अब युद्ध के समय सिस्टम से हथियारों को सटीकता से संचालित करना और लक्ष्य तक पहुंचाना बेहद आसान हो जाएगा दरअसल किसी दूसरे देश पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रह सकते हैं। वह जब चाहे से बंद कर सकता है।

या GPS इस्तेमाल रोक सकता है। इसके अलावा GPS जैसी सिस्टम को कानूनन आप युद्ध के समय। इसे इस्तेमाल नहीं कर सकते है। लिहाजा भारत को एक ऐसा सिस्टम चाहिए था जो। पूरी तरह। से भारत के नियंत्रण में हो।

सबसे खास क्यों है ।SRO का नाविक? (navic)

NAVIC

बताया जा रहा है navic का Accuracy करीब 5 मीटर तक होगी वहीं अमेरिकी GPS की बात करें तो वह 20 से 30 मीटर तक के दायरे को सटीकता से दिखा सकता है।

यानी कि जीपीएस के मुकाबले नाविक। कहीं ज्यादा सटीकता। से अपने काम को अंजाम दे सकता है।

नेविगेशन के मामले में भारत ऐसा करने 3 देश बन जायेगा।(navic)

वह इस पहले अमेरिकी GPS और रूसी ग्लोनासा सिस्टम काफी सफल रहे है हालांकि चीनी विदाउ और यूरोपियन गैलीलियो फ्लॉप रहे।

स्पेस के दुनिया मे ISRO की लोहा पूरी दुनिया ने देखा है । यह बात इसके नेविगेशन सिस्टम से भी चलता है ।अमेरिका धौस ना दिखा सके इसलिए महज़ 3 साल में ही सारे सैटेलाइट लांच कर दिये गये । जिनकी सटीकता देखते ही बनती है।

भारत फिलहाल 8 सैटेलाइट के दम पर पूरी सटीकता से काम कर रहा है। जबकि अमेरिकी GPS सिस्टम यानी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम में 32 सैटेलाइट काम कर रहे हैं।

वही रूसी सैटेलाइट ग्लोनॉस में 26 सैटेलाइट काम करते हैं। गैलीलियो नाम की सिस्टम में भी 26 सैटेलाइट काम में लिया गया है ।जबकि चीन के (BDS) यानी कि BeiDou Navigation Satellite System में 35 सैटेलाइट लगे हैं। और हाल ही में चीन ने अपना एक और शक्तिशाली सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा है

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बावजूद नेविगेशन जगत में भारत की अपना कामयाबी का जलवा बिखेरा है।

नाविक में पहले 7 सैटेलाइट थे लेकिन अब इसरो ने 9 सैटेलाइट लॉन्च किए हैं।
बड़ा मददगार साबित होगा नाविक।

भारत का यह नेविगेशन सिस्टम भारत से डेढ़ हजार किलोमीटर तक नजर रख सकता है इसके दायरे में पूरा दक्षिण एशिया जाता है।

इसका उपयोग प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का जल्द से जल्द आकलन और सुदूर इलाकों में मदद में लिया जा सकता है।

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